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    सुन साहिबा सुन !

     

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    सुन साहिबा सुन !


    देर रात शराबियों की एक टोली क्लब से निकलकर एक मकान के सामने जा रुकी । एक साहब ने बढ़कर दरवाजा खटखटाया, तो ऊपर से एक साहिबा ने झाँका और पूछा - क्यों? क्या है?

    साहब - क्या अकबर साहब का मकान यही है

    साहिबा - हाँ, कहो क्या है?

    साहब - आप उनकी बेगम हैं?

    साहिबा - हाँ-हाँ ! मैं ही हूँ। बताइए, आप क्या चाहते हैं?

    साहब - आप कृपया नीचे तशरीफ लाएँ और हम लोगों में से अकबर साहब को पहचान कर ले जाएँ ताकि बाकी लोग अपने-अपने घर जा सकें।

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