महात्मा विदुर से जानिए त्याग देने योग्य छः दोष एवं छः प्रकार के व्यक्ति
ऐश्वर्य या उन्नति चाहनेवाले पुरुषोंको नींद, तन्द्रा (ऊँघना), डर, क्रोध, आलस्य तथा दीर्घसूत्रता (जल्दी हो जानेवाले काम में अधिक देर लगानेकी आदत)-इन छ: दुर्गुणोंको त्याग देना चाहिये।
उपदेश न देनेवाले आचार्य, मन्त्रोच्चारण न करनेवाले होता, रक्षा करने में असमर्थ राजा, कटु वचन बोलने वाली स्त्री, ग्राम में रहने की इच्छा वाले ग्वाले तथा वनमें रहनेकी इच्छावाले नाई—इन छःको उसी भाँति छोड़ दे, जैसे समुद्रकी सैर करनेवाला मनुष्य फटी हुई नावका परित्याग कर देता है।
मनुष्यको कभी भी सत्य, दान, कर्मण्यता, अनसूया (गुणोंमें दोष दिखानेकी प्रवृत्तिका अभाव), क्षमा तथा धैर्य-इन छः गुणोंका त्याग नहीं करना चाहिये।
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