Home/Ethics/Vidur Niti/विदुरनीति - कौन प्रधान है, देवता किसके अभ्युदयकी सिद्धि करते हैं, किस विद्वान्की नीति श्रेष्ठ है और अनर्थ किसको त्याग देते हैं..
विदुरनीति - कौन प्रधान है, देवता किसके अभ्युदयकी सिद्धि करते हैं, किस विद्वान्की नीति श्रेष्ठ है और अनर्थ किसको त्याग देते हैं..
कौन प्रधान है, देवता किसके अभ्युदयकी सिद्धि करते हैं, किस विद्वान्की नीति श्रेष्ठ है और अनर्थ किसको त्याग देते हैं..
जो बुद्धिमान् दम्भ, मोह, मात्सर्य, पापकर्म, राजद्रोह, चुगलखोरी, समूहसे वैर और मतवाले, पागल तथा दुर्जनोंसे विवाद छोड़ देता है, वह श्रेष्ठ है ।
जो दान, होम, देवपूजन, माङ्गलिक कर्म, प्रायश्चित्त तथा अनेक प्रकारके लौकिक आचार-इन नित्य किये जानेयोग्य कर्मोंको करता है, देवतालोग उसके अभ्युदयकी सिद्धि करते हैं।
जो अपने बराबरवालोंके साथ विवाह, मित्रता, व्यवहार तथा बातचीत करता है, हीन पुरुषोंके साथ नहीं; और गुणोंमें बढ़े-चढ़े पुरुषोंको सदा आगे रखता है, उस विद्वान्की नीति श्रेष्ठ है॥
जो अपने आश्रितजनोंको बाँटकर थोड़ा ही भोजन करता है, बहुत अधिक काम करके भी थोड़ा सोता है तथा माँगने पर जो मित्र नहीं है, उसे भी धन देता है, उस मनस्वी पुरुषको सारे अनर्थ दूरसे ही छोड़ देते हैं ॥
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