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    विदुरनीति - महात्मा विदुर से जानिए विद्द्वान पुरुष की क्या पहचान होती है

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    महात्मा विदुर से जानिए विद्द्वान पुरुष की क्या पहचान होती है 

    • अपने वास्तविक स्वरूपका ज्ञान, उद्योग, दुःख सहनेकी शक्ति और धर्ममें स्थिरता-ये गुण जिस मनुष्यको पुरुषार्थसे च्युत नहीं करते, वही विद्द्वान कहलाता है ॥
    • जो अच्छे कर्मोंका सेवन करता और बुरे कर्मोंसे दूर रहता है, साथ ही जो आस्तिक और श्रद्धालु है, उसके वे सद्गुण विद्द्वान होनेके लक्षण हैं ।।
    • क्रोध, हर्ष, गर्व, लज्जा, उद्दण्डता तथा अपनेको पूज्य समझना----ये भाव जिसको पुरुषार्थसे भ्रष्ट नहीं करते, वही विद्द्वान कहलाता है ॥ 
    • दूसरे लोग जिसके कर्तव्य, सलाह और पहलेसे किये हुए विचारको नहीं जानते, बल्कि काम पूरा होनेपर ही जानते हैं, वही विद्द्वान कहलाता है ॥
    • सर्दी-गर्मी, भय-अनुराग, सम्पत्ति अथवा दरिद्रता-ये जिसके कार्यमें विघ्न नहीं डालते वही विद्द्वान कहलाता है ॥ 
    • जिसकी लौकिक बुद्धि धर्म और अर्थका ही अनुसरण करती है और जो भोगको छोड़कर पुरुषार्थका ही वरण करता है वही विद्द्वान कहलाता है ॥
    • विवेकपूर्ण बुद्धिवाले पुरुष शक्तिके अनुसार काम करनेकी इच्छा रखते हैं और करते भी हैं तथा किसी वस्तुको तुच्छ समझकर उसकी अवहेलना नहीं करते ।
    • विद्वान् पुरुष किसी विषयको देरतक सुनता है किंतु शीघ्र ही समझ लेता है, समझकर कर्तव्यबुद्धिसे पुरुषार्थमें प्रवृत्त होता है-कामनासे नहीं; बिना पूछे दूसरेके विषयमें व्यर्थ कोई बात नहीं कहता है। उसका यह स्वभाव विद्द्वान की मुख्य पहचान है ॥
    • विद्द्वान की-सी बुद्धि रखनेवाले मनुष्य दुर्लभ वस्तुकी कामना नहीं करते, खोयी हुई वस्तुके विषयमें शोक करना नहीं चाहते और विपत्तिमें पड़कर घबराते नहीं हैं ॥ 
    • जो पहले निश्चय करके फिर कार्यका आरम्भ करता है, कार्यके बीचमें नहीं रुकता, समयको व्यर्थ नहीं जाने देता और चित्तको वशमें रखता है, वही विद्द्वान कहलाता है ॥ 
    • विद्द्वानजन श्रेष्ठ कर्मों में रुचि रखते हैं, उन्नतिके कार्य करते हैं तथा भलाई करनेवालों में दोष नहीं निकालते हैं ॥
    • जो अपना आदर होनेपर हर्षके मारे फूल नहीं उठता, अनादरसे संतप्त नहीं होता तथा गङ्गाजी के कुण्डके समान जिसके चित्तको क्षोभ नहीं होता, वह विद्द्वान कहलाता है॥
    • जो सम्पूर्ण भौतिक पदार्थोंकी असलियतका ज्ञान रखनेवाला, सब कार्योक करनेका ढंग जाननेवाला तथा मनुष्योंमें सबसे बढ़कर उपायका जानकार है, वही मनुष्य विद्द्वान कहलाता है ।
    • जिसकी वाणी कहीं रुकती नहीं, जो विचित्र ढंगसे बातचीत करता है, तर्क में निपुण और प्रतिभाशाली है तथा जो ग्रन्थके तात्पर्यको शीघ्र बता सकता है, वही विद्द्वान कहलाता है ॥

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