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    चंद्र और मंगल के योग का आप पर प्रभाव व उपाय

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    चंद्र और मंगल के योग का आप पर प्रभाव व उपाय

    दो ग्रहों के योग व उपाय

    जब दो ग्रहों का योग हो तो कष्ट के निवारण के लिए किन-किन वस्तुओं का दान और किन रत्नों को धारण करना उचित है, यह जानना प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है। ऐसा अनेकों बार देखा गया है कि नन्मकुंडली में कोई भी ग्रह अकेले न बैठकर दो या इससे भी ज्यादा संख्या में बैठे होते हैं। ऐसी हालत में यह जानना बहुत जरूरी हो जाता है कि ग्रहों के इस योग का फल अच्छा निकलेगा या बुरा।

    चंद्र और मंगल

    जब चंद्र और मंगल का योग हो तो पहले यह अच्छी तरह से देख लें कि कुंडली में चंद्र शुभ है या पापी है। यदि चंद्र सूर्य से ७२ अंश तक की दूरी के अंदर-अंदर है, तो यह निश्चित रूप से पापी समझा जाएगा। __ऐसी स्थिति में चंद्र और मंगल जिन घरों के स्वामी हैं, उनको हानि पहुंचेगी।

    मान लीजिए, कुम्भ लग्न है और चंद्र और मंगल वृश्चिक राशि में दसवें घर में स्थित हैं और सूर्य नौवें तथा बारहवें घर में है। यहां तीसरे घर का स्वामी मंगल को चंद्र से युति द्वारा हानि पहुंचेगी और फल होगा, छोटे भाई की हानि तथा उससे वैमनस्य।

    इस प्रकार की स्थिति में सुधार करने के लिए मंगल को और अधिक बलवान् करना होगा। अर्थात् सोने की अंगूठी में मूंगा लगवाकर पहनना होगा। इस क्रिया से मंगल को बल मिलेगा तथा चंद्र की शांति कराई जाएगी। शिव की पूजा, चंद्र के मंत्र का जाप, सोमवार के व्रत द्वारा तथा चंद्र से संबंधित वस्तुओं, जैसे दूध, चावल, चांदी आदि के दान द्वारा चंद्र (क्षीण) और मंगल को उक्त युति का यह फल होगा कि माता को कष्ट की प्राप्ति होगी। क्योंकि मंगल का प्रभाव चौथे घर और माता के कारक दोनों पर होगा। चंद्र का उपाय चांदी की अंगठी में मोती लगवाकर पहनने से और मंगल की शांति श्री गणेश जी की पूजा, मंगल के मंत्र का जाप, व्रत तथा इनसे संबंधित वस्तुआ जैसे लाल कपड़ा, मसर की दाल आदि के दान द्वारा होगी।

    नोट-मंगल और चंद्र के बारे में भी यही फल समझना चाहिए। 

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